शहर में शिक्षा के नाम पर ‘अंधेर नगरी-चौपट राजा’ वाला हाल है। शिक्षा विभाग की नाक के नीचे निजी स्कूलों की मनमानी और लापरवाही का ऐसा नंगा नाच चल रहा है, जो मासूम बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है।
शहर में ऐसे दर्जनों स्कूल हैं जिनके पास बुनियादी मान्यता तक नहीं है, फिर भी वे बेखौफ होकर स्कूल चला रहे हैं। हद तो तब हो जाती है जब कई स्कूलों के पास मान्यता तो हरियाणा बोर्ड की है, लेकिन वे अभिभावकों को गुमराह कर सीबीएसई पैटर्न पर पढ़ाई और रजिस्ट्रेशन का झांसा दे रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन स्कूलों के पास केवल आठवीं कक्षा तक की मान्यता है, वहां 10वीं और 12वीं के छात्र कैसे पढ़ रहे हैं?
लेनदेन का खेल: यह स्कूल दूसरे बड़े स्कूलों के साथ ‘मार्कशीट का सौदा’ करते हैं।
बच्चे पढ़ते इन छोटे और अवैध स्कूलों में हैं, लेकिन परीक्षा के समय इनका डेटा मोटी रकम लेकर मान्यता प्राप्त स्कूलों में भेज दिया जाता है।
इस मिलीभगत के कारण बच्चों को वो गुणवत्ता नहीं मिल पाती जिसके वे हकदार हैं।
क्या यह मुमकिन है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक न हो? चर्चा आम है कि इसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों और रसूखदारों की सीधी मिलीभगत है। बिना राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के इतना बड़ा सिंडिकेट चलाना नामुमकिन है।
फरीदाबाद वायरल सच पूछता है:
शिक्षा मंत्री और विभाग के आला अधिकारी इन अवैध स्कूलों पर बुलडोजर कब चलाएंगे?
क्या मासूमों के भविष्य का सौदा करने वाले इन ‘शिक्षा माफियाओं’ पर एफआईआर होगी?
जिले में शिक्षा के नाम पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का एक बड़ा खेल कई सालों से चल रहा है। वायरल सच की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा विभाग के अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के बिना यह संभव नहीं है कि बिना मान्यता के स्कूल धड़ल्ले से चल रहे हों।
जिले में कई ऐसे स्कूल हैं जिनके पास कोई वैध मान्यता नहीं है, फिर भी वे बेखौफ होकर स्कूल चला रहे हैं। विभाग की नाक के नीचे चल रहे इन स्कूलों पर कोई कार्रवाई न होना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।
कई स्कूल हरियाणा बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन वे अभिभावकों को गुमराह कर सीबीएसई बोर्ड का पाठ्यक्रम पढ़ा रहे हैं और परीक्षाएं दिला रहे हैं। यह पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन है।
हजारों बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी और मंत्री इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। यह स्पष्ट है कि बिना विभाग की ‘मिलीभगत’ के इतना बड़ा संगठित फर्जीवाड़ा नहीं चल सकता। अभिभावकों की मांग है कि ऐसे अवैध स्कूलों को तुरंत बंद किया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
आप इस फर्जीवाड़े के शिकार होने से बचने के लिए CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर किसी भी स्कूल की मान्यता की स्थिति स्वयं जांच सकते हैं।
कौन से स्कूल और अधिकारी इस खेल में शामिल हो रहे हैं।यह बताने के लिए जल्द ही इसका दूसरा संस्करण भी प्रकाशित किया जाएगा।












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