“एक चिंगारी… पूरा सिस्टम जिम्मेदार!”स्कूल नहीं, ‘मौत का करंट ज़ोन’! हाई टेंशन लाइन के नीचे पढ़ रहे मासूम — 6 महीने से जिला शिक्षा अधिकारी की चुप्पी पर बड़े सवाल

वॉइस आफ हरियाणा, फरीदाबाद( हरेंद्र स्वामी )

नियमों की धज्जियां उड़ाकर मिली एनओसी और मान्यता, हादसा हुआ तो कौन जाएगा जेल?

शहर का सेक्टर-86 स्थित सेंट पीटर स्कूल इन दिनों शिक्षा का मंदिर कम और खतरे का खुला मैदान ज्यादा नजर आ रहा है।
स्कूल के मेन गेट के सामने ओर खेल मैदान के ठीक ऊपर से गुजर रही 11 किलोवाट हाई टेंशन बिजली लाइन हर पल किसी बड़े हादसे का इंतजार करती दिखाई दे रही है।
नीचे मासूम बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं…
और उनके सिर के ऊपर हजारों वोल्ट का करंट मौत बनकर लटक रहा है।
जरा सी चिंगारी, तार टूटना या बारिश के दौरान करंट फैलना और पूरा परिसर हादसे की चपेट में आ सकता है।

बता दें इस जानलेवा खतरे की लिखित शिकायत करीब 6 महीने पहले जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में दी गई, लेकिन आज तक न जांच, न नोटिस, न कार्रवाई।
शिकायत कर्ता का आरोप है कि
“जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होगा, तब तक अफसर कुर्सी से नहीं उठेंगे।”

लोगों का कहना है कि प्रशासन अनहोनी के बाद ही क्यों जगाता है, उसके पहले कभी क्यों नहीं करता।क्या वह अनहोनी के इंतजार में है?

जबकि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सुरक्षा अधिनियम) 2010 के अनुसार 11 किलोवाट या उससे अधिक की लाइनों और भवनों के बीच न्यूनतम सुरक्षित दूरी अनिवार्य
आबादी/सार्वजनिक स्थानों से लाइन हटाना या शिफ्ट करना बिजली विभाग की जिम्मेदारी है।
नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार 2016 स्कूल, अस्पताल जैसे सार्वजनिक भवनों के ऊपर हाई टेंशन लाइनों को नहीं ले जाना प्रतिबंधित है।
सुरक्षा मानकों का पालन न होने पर भवन असुरक्षित घोषित
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (धारा 19) के अनुसार
बच्चों के लिए सुरक्षित परिसर अनिवार्य सुनिश्चित करना एवं
असुरक्षित पाए जाने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने का प्रावधान है। हरियाणा स्कूल शिक्षा नियम के तहत
स्कूलों में फायर, बिल्डिंग सेफ्टी, बिजली विभाग आदि अन्य विषयों पर जांच पड़ताल कर मान्यता देने का प्रावधान है लेकिन यहां कुछ अलग ही देखने को मिला।लोकल अथॉरिटी की एनओसी के बिना मान्यता देना गैरकानूनी है।

शिकायतकर्ता और लोगों का कहना है कि जब कानून इतने सख्त हैं तो जिम्मेदार कैसे कानून को भूल गए।
यही ही नहीं बिजली विभाग को स्कूल परिसर नहीं दिखाई दिया और उन्होंने एनओसी दे दी। यही हाल शिक्षा विभाग का भी है जिन्होंने बच्चों की परवाह किए बिना स्कूल को मान्यता दे दी।

बिजली विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को तो नहीं दिख रहा इसके साथ ही हर साल होने वाले सेफ्टी ऑडिट में ये जानलेवा लाइन अफसरों को भी नहीं दिखी।
हालांकि लोगों का कहना है कि अफसर एक दूसरे से मिले हुए हैं जिस कारण उन्हें लापरवाही नहीं दिख रही।
देखना यह है कि बिजली विभाग और शिक्षा विभाग इस मामले पर क्या संज्ञान लेते हैं?

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