बांग्लादेश चुनाव में BNP की बंपर जीत, 17 साल बाद लौटे तारिक रहमान का पीएम बनना तय; 10 बड़ी बातें

बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के बाद वोटों की गिनती जारी है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की बीएनपी प्रचंड जीत की ओर अग्रसर है, जिसने 151 सीटें जीती हैं। यह चुनाव शेख हसीना की अनुपस्थिति में हुआ। हसीना ने धांधली का आरोप लगाते हुए चुनाव रद्द करने की मांग की है। भारत इस पर बारीकी से नजर रख रहा है।

बीएनपी ने 151 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार किया

तारिक रहमान 17 साल बाद लौटे, बने पीएम पद के दावेदार

शेख हसीना ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया

बांग्लादेश में गुरुवार को हुए 13वें संसदीय चुनाव के बाद वोटों की गिनती जारी है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की अगुवाई वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) प्रचंड जीत हासिल करती हुई नजर आ रही है।

रॉयटर्स ने एक स्थानीय टीवी के हवाले से कहा कि बीएनपी ने 300 सदस्यों वाली संसद में 151 सीटें जीत ली हैं जबकि कई अन्य सीटों पर उसके उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं।

बांग्लादेश चुनाव 2026 के नतीजों के 10 मुख्य बिंदु

  1. भारतीय समयानुसार बांग्लादेश में गुरुवार शाम 4 बजे मतदान समाप्त हुआ। चुनाव के बाद वोटों की गिनती जारी है। शुक्रवार सुबह लगभग 5 बजे आए अनुमानों के मुताबिक, बीएनपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 151 सीटें जीतीं, जबकि जमात के नेतृत्व वाले गठबंधन को 43 सीटें मिलीं।
  2. 350 में 299 सीटों पर हुआ मतदान
    गुरुवार को हुए चुनाव में जातीय संसद की 299 सीटों के लिए मतदाताओं ने मतदान किया, जिसके लिए बहुमत का आंकड़ा 150 है। शेरपुर-3 निर्वाचन क्षेत्र में एक उम्मीदवार की मृत्यु के कारण मतदान रद कर दिया गया था। जातीय संसद में 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, और उनका चुनाव 300 सामान्य सीटों में दलों के प्रतिनिधित्व के आधार पर होता है।
  3. बांग्लादेश में पहला ऐसा चुनाव
    बांग्लादेश में ऐसा पहला आम चुनाव हो रहा है, जब अवामी लीग की प्रमुख शेख हसीना शामिल नहीं हैं और वह भारत में हैं। वहीं, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया, जिनका पिछले साल दिसंबर में निधन हो गया था। खालिदा जिया ने दशकों तक देश की राजनीति पर अपना दबदबा बनाए रखा था।
  4. 17 वर्षों बाद लौटकर कैसे जीतें चुनाव?
    खालिदा जिया की मौत के बाद उनके बेटे तारिक रहमान लगभग 17 वर्षों के निर्वासन के बाद देश लौटे और अवामी लीग की अनुपस्थिति में प्रधानमंत्री पद के लिए तेजी से अग्रणी दावेदार के रूप में उभरे, क्योंकि अवामी लीग अपना पंजीकरण निलंबित होने के कारण चुनाव नहीं लड़ सकी।
  5. बीएनपी का मुख्य प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन है। जमात कई वर्षों तक बीएनपी का सहयोगी रहा है। जमात का समर्थन करने वाली पार्टियों में नेशनल सिटिजन पार्टी भी शामिल है। छात्रों और युवाओं का यह वही संगठन है जो हसीना विरोधी प्रदर्शनों से उभरा है।
  6. ढाका से पहले हिंदू सांसद बनने की संभावना
    बांग्लादेश में वोटों की गिनती जारी है। शुरुआती रुझानों में गायेश्वर चंद्र रॉय ढाका 3 सीट से बढ़त बनाए हुए हैं। अगर वह चुनाव जीतते हैं तो 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति के बाद ढाका से पहले हिंदू सांसद बनने की संभावना रखते हैं।
  7. मतदाताओं ने जुलाई के राष्ट्रीय चार्टर पर जनमत संग्रह में भी मतदान किया, जिसमें मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार और कई राजनीतिक दलों द्वारा सहमत प्रमुख सुधार प्रस्ताव शामिल हैं। चार्टर में प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल को दो (10 वर्ष) तक सीमित करना, संसद के ऊपरी सदन की स्थापना करना और कार्यवाहक प्रणाली को बहाल करना शामिल है।
  8. आज एक नए बांग्लादेश का जन्मदिन
    नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद युनुस ने उत्साहपूर्वक कहा कि चुनाव का दिन अत्यंत खुशी का दिन है। उन्होंने कहा, “आज एक नए बांग्लादेश का जन्मदिन है। किसी उम्मीदवार को वोट देना महत्वपूर्ण है, लेकिन जनमत संग्रह बहुत महत्वपूर्ण है। पूरा बांग्लादेश बदल जाएगा।”
  9. चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप
    वहीं, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए चुनाव रद करने की मांग की। शेख हसीना ने दावा किया कि मतदान कम हुआ था और मतदान केंद्र पूरी तरह से मतदाताओं से खाली थे। इस स्थिति में, हम इस मतदाताविहीन, अवैध और असंवैधानिक चुनाव को रद् करने और यूनुस के इस्तीफे की मांग करते हैं।
  10. भारत की नजर
    बांग्लादेश चुनाव पर भारत बारीकी से नजर रख रहा है क्योंकि इसका असर नई दिल्ली और ढाका के संबंधों पर पड़ सकता है। भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों और हिंदुओं की हत्याओं को लेकर निंदा की है। चुनाव के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “बांग्लादेश में चुनाव हो रहे हैं। हमें नतीजों का इंतजार करना चाहिए ताकि पता चल सके कि किस तरह का जनादेश आया है…और उसके बाद हम मौजूदा मुद्दों पर गौर करेंगे।”

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